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क्रूस से बहके आती है खून की धार जिसमे पिता का है प्रेम अपार
SONG NO #HI00114
क्रूस से बहके आती है खून की धार
जिसमे पिता का है प्रेम अपार
बहते बहते मुझको वहाँ ले जा
प्रेम के सागर मैं;-
प्रेमी प्रभु मेरे ईसू - 2
दिन प्रति दिन तू मुझमें बड़े
घटता रहू तब मैं - 2
ढ़ूँढा मुझे अनंत प्रेम से
अनंत आशीष दी है मुझे
मुझ हीन को योग्य बना दिया
परम पिता के लिए
इस जग में गरीबी से गिर जाऊ मैं
प्यार तेरा हे काफी मुझे
आत्मा मेरे तेरे प्रेम से परिपूर्ण हैं
घटी नहीं हैं मुझे
इस जग में प्रशंसा मैं किसकी करूं
कोई नहीं हैं तेरे सिवा
प्रभु तेरा प्रेम मेरा स्तुती गीत हैं
मेरा आनंद हैं
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