जीवन जल आत्मा प्रभु
बहती नदिया सा आ तू प्रभु
आ प्रभु, सदगुरू
बहती नदिया जैसा।
थोड़ा डूबूँ काफी नहीं
ज्यादा डूबूँ काफी नहीं
पूरा पूरा डूबना है
डूब डूब मगन होना है।
इसमें बहती आरोग्यता
इसमें मिलती है शुद्धता
इसमें बहती है शान्ति
इसमें मिलती सम्पन्नता।
कोटि-कोटि मछुआरे आओ
जल्दी जल्दी जालें लगाओ
गाते गाते मछली पकड॒लो
आत्माओं से घर भर दो।
नदी के तट पर पेड़ अनेकों
देने होंगे फल भी अनेकों
पत्ते बन जायेंगे दवा
फल बन जायेंगे भोजन।